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योगी सरकार ने 2018 में उत्तर प्रदेश से जापानी बुखार को ख़त्म करने के लिए की पूरी तैयारी – पढ़ें और जानें कैसे

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश के नौनिहालों के सबसे बड़े दो दुश्मनों – जापानी बुखार और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के विरुद्ध जंग छेड़ दी है। इस जंग में योगी सरकार के सिपहसालार बने हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि WHO और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानि यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रंस फंड।

योगी सरकार ने एक जनवरी 2018 से एक साल तक की पूरी योजना बनाई है जिसमें उन्होंने जल्द टीकाकरण, सूअरों को संक्रमित जगहों से दूर रखने, संक्रमण रोकने के लिए फॉगिंग करने के लिए रैपिड एक्शन टीमें बनाने, केवल “इंडिया मार्क 2” नलों अथवा हैंडपंप से पानी पीने के लिए प्रोत्साहित करने, और माता पिताओं को बच्चों को मिट्टी के फर्श पर नहीं सोने देने और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत 108 पर फोन करने जैसे उपायों की सूची पर कमर कस ली है।

यह अपने आप में इन दोनों जानलेवा बीमारियों से युद्ध स्तर पर लड़ने वाला, हर महीने के टारगेट रखने वाला पहला प्लान है।

2018 में इस योजना के अन्तर्गत, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बस्ती मंडलों के 9 सबसे बुरे प्रभावित जिलों के 10 बाल आईसीयू में पांच बेड प्रति आईसीयू बढ़ाए जाएंगे। इन जिलों से इन जापानी बुखार और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के 85% मामले सामने आते हैं।

इसके अलावा, इन जिलों में ब्लॉक स्तर पर खोले गए 104 इंसेफेलाइटिस उपचार केंद्रों को इन दोनों बीमारियों के इलाज के लिए सभी आवश्यक दवाइयों से लैस किया जाएगा। इनमें से 15 उपचार केंद्रों पर मिनी बाल आईसीयू खोले जाएंगे जिनमें हर आईसीयू में 3 बेड और एक वेंटिलेटर की सुविधा रहेगी। योगी सरकार की यह योजना ज़मीनी स्तर पर मजबूत है।

मेडिकल कॉलेज रेफर करने के लिए इन चिकित्सा केंद्रों के लिए नए नियम बनाए गए हैं। नियमों में यह तक मौजूद है कि बच्चों को किस तरह एम्बुलेंस में लेटाया जाए और इन चिकित्सा केंद्रों में किं दवाएं किन हालात में बच्चों को दी जाएं ताकि बेहतरीन इलाज उनको मिल सके।

इस बीमारी से होने वाली प्रत्येक मृत्यु का पूर्ण आंकलन किया जाएगा। बैक्टीरिया से होने वाली इन बीमारियों का प्रकोप मानसून के मौसम में बढ़ जाता है, जिस पर खास ध्यान दिया जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गरीब परिवारों के 1 से 15 वर्ष के बच्चे, कुपोषण एवं कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के चलते इन बीमारियों की चपेट में जल्दी आते हैं।

योगी सरकार की इस योजना के हिसाब से 617 अति संवेदनशील गांवों को पूर्ण साफ सफाई और खुले में शौच में मुक्ति के लिए चिन्हित किया गया है। इसके अलावा, राज्य, जिले और ब्लॉक स्तर पर कहीं भी इन बीमारियों का पता चलते ही तुरंत हस्तक्षेप करने के लिए टीमों का गठन किया गया है। जलभराव रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं।

जापानी बुखार और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम जैसी जानलेवा बीमारियों को जड़ से उखाड़ने के लिए इतनी बड़ी योजना बनाने से अधिक बड़ा इसको ज़मीन पर उतारने का काम है।

सरकारी योजनाओं को आम तौर पर शक की निगाह से देखने वाले भी अब योगी के आने के बाद इसी उम्मीद में हैं कि यह योजना सफल होगी और उत्तर प्रदेश के बच्चों को इन बीमारियों से मुक्ति मिलेगी।

 

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One comment

  1. Very practical approach to solve the menace of Japanese encephalitis from rural areas.thumbs up yogi govt.

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