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हरियाणा : सीएम ने किसानों के लिए शुरू की भावान्तर भरपाई योजना, जानिए क्या है “भावान्तर भरपाई योजना”!

प्रदेश के किसानों के हितों को ध्यान में रख फसलों के विविधिकरण पर बल देते हुए प्रदेश सरकार ने देश में सर्वप्रथम भावान्तर भरपाई योजना की शुरूआत की है, जिसमें टमाटर, प्याज, आलू और गोभी की सब्जियां शामिल हैं। इस योजना के लिए सरकार द्वारा एक अलग फंड भी बनाया जाएगा। योजना की शुरूआत मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने करनाल के गांगर गांव से की।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने भावान्तर भरपाई ई-पोर्टल व क्रोप कल्सटर डेवल्पमैंट कार्यक्रम के अन्र्तगत टमाटर उत्पादक किसान का रजिस्टे्रशन भी किया। मुख्यमंत्री ने किसानों से संवाद स्थापित करते हुए कहा कि भावान्तर का मतलब भाव-अन्तर है, अर्थात भाव के अन्तर की भरपाई। उन्होंने कहा कि जिन चार फसलों की भरपाई की जाएगी उनमें टमाटर के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, आलू के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल, गोभी और प्याज के लिए 500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भरपाई करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना के तहत इन मूल्य से कम मूल्य होने पर आने वाले अन्तर की भरपाई करेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना के तहत इन मूल्य से कम मूल्य होने पर आने वाले अन्तर की भरपाई करेगी।

भावान्तर भरपाई योजना का संक्षिप्त विवरण:

योजना के मुख्य उद्देश्य:

  • मण्डी में सब्जी व फल की कम कीमत के दौरान किसानों का निर्धारित संरक्षित मूल्य द्वारा ज़ोखिम को कम करना।
  • कृषि में विविधिकरण के लिए किसानों को प्रोत्साहित करना।

पहले चरण में योजना के अंतर्गत शामिल फसलें, संरक्षित मूल्य व निर्धारित उत्पादनः

  • चार फसलेंः टमाटर, प्याज, आलू एवं फूलगोभी।
  • चिन्हित फसलों का संरक्षित मूल्य एवं निर्धारित उत्पादन।

योजना की मुख्य विशेषताएं:

  • सब्जी काश्तकारों को जोखिम मुक्त करना।
  • योजना के अंतर्गत उक्त चार फसलों पर रुपए 48000/ – से रुपए 56000/ – प्रति एकड़ आमदनी सुनिश्चित करना।
  • योजना के अंतर्गत चार सब्जियों (टमाटर, प्याज, आलू एवं फूलगोभी) के लिए संरक्षित मूल्य निर्धारित करना।
  • मण्डी में निर्धारित अवधि के अन्दर सब्जी के कम दाम में बिकने पर वेबसाईट (www.hsamb.gov.in) पर BBY ई-पोर्टल के माध्यम से
  • पंजीकृत किसानों को संरक्षित मूल्य तक भाव के अंतर की सरकार द्वारा भरपाई।
  • इस स्कीम का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार या किराये पर काश्तकार लेने के पात्र।

इस मौके पर सुक्ष्म सिंचाई के सम्बंध में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पराम्परागत फसलों के मुकाबले आलू, गोभी, टमाटर और प्याज फसलों में सुक्ष्म सिंचाई अपनाई जाए ताकि पानी की बचत हो। उन्होंने कहा कि हरियाणा में ऐसे कई इलाके है जहां पर इंसान को पानी पीने के लिए भी टैंकर द्वारा सप्लाई दी जाती है इसलिए हम सभी को हरियाणा के हित में सोचते हुए सुक्ष्म सिंचाई को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुक्ष्म सिंचाई से लगभग 30 प्रतिशत पानी से काम चल जाता है और 60 से 70 प्रतिशत पानी की बचत होती है।उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान स्वयं अपनी पैदावार को सीधा मंडी में बेचे इसके लिए हमारे पास दिल्ली जैसी बहुत बड़ी मंडी उपलब्ध है जो हमारी पैदावार की खपत कर सकती है।

प्रत्येक जिला में सरकार छोटी-छोटी मंडियां बनने जा रही है ताकि किसान अपने उत्पाद वहां लाकर बेच सकें। इसी प्रकार गन्नोर में एशिया की सबसे बडी मंडी स्थापित की जा रही है, जो फल और सब्जी की सबसे बड़ी मंडी होगी। उन्होंने किसानों से रूबरू होते हुए कहा कि सरकार किसानों के उत्पाद की सुरक्षा के लिए कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधा भी देने पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां भी राज्य में स्थापित की जा रही हैं , जहां पर टमाटर, आलू और गोभी जैसे उत्पादों की सप्लाई करके उत्पाद बनाएं जाएंगे। सीएम ने कहा कि हमारी जोत छोटी होती जा रही है, इसलिए हमें खाद्य प्रसंस्करण पर जाना होगा, इसके लिए बहुत से लोग निवेश करने को तैयार है लेकिन प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सब्जियों और फलों में विटामिन-डी होता है जो शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का किसान जोखिम फ्री हो इसके लिए इस योजना की शुरूआत देश में सबसे पहले हरियाणा में की गई है और किसान के उत्पादक की लागत को बचाने के लिए इस योजना को शुरू किया गया है ताकि किसान फसलों के विविधिकरण के साथ-साथ सुक्षम सिंचाई योजना पर भी जाए।

उन्होंने कहा कि कई बार किसानों की बक्वपर पैदावार होने से उनकी फसल का उपयुक्त दाम मंडी में नही मिलता है और वह ट्रांसपोर्टेशन के खर्च को नही उठाना चाहता क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन का खर्च होने के पश्चात मंडी में उसकों उसकी लागत का मूल्य नही मिलता। इस भाव के अन्तर को पाटने के लिए सरकार द्वारा भावान्तर भरपाई योजना शुरू की गई है ताकि किसान को एक संरक्षित मूल्य मिल सकें।

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4 comments

  1. Good steps of haryana government.it should be implemented to all agricultural products.

  2. राकेश चन्द्र वर्मा

    सरकार का यह एक प्रसंशनीय कदम है,परन्तु कुछ राज्य सरकारों ने किसानों की बहुत अनदेखी की है और उन्हें नाराज किया है,अब केंद्र सरकार का दायित्व है कि वह इनके कल्याण की कोई योजनाये लाये जिससे इनकी नाराजगी दूर हो वरना 2019 में इनके वोट गड़बड़ मर सकते है जो एक अप्रिय स्थिती होगी।

  3. Ye ek sarahnïy kam he ese sbhi Rajyoo ko lana chahiye Es yojna se sbi kisano ko raht milegi aur yojna pahle U P me jaruri ki yaha kisan bahut paresan he.Jai ModiJi.Jai Bhart I Love My India.

  4. अब सुधरे होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत
    बीजेपी से किसान बेरोजगार युवा सख्त नाराज है नाराज मत दाता विना पसंद के भी वोट किसी को भी दे देगा वित्त मंत्री सही नही बनाया गया।

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